Krishna के जन्म को लेकर परंपरागत मान्यता धार्मिक, पौराणिक और खगोल–ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है, इसलिए एक ही “पक्की” तारीख नहीं मानी जाती; सामान्य रूप से माना जाता है कि वे द्वापर युग के अंत में, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी, आधी रात के समय, रोहिणी नक्षत्र में मथुरा में जन्मे थे।

अलग–अलग माने जाने वाले जन्म–वर्ष

विभिन्न विद्वान और परंपराएँ कृष्ण जन्म का वर्ष अलग–अलग बताती हैं:

  • कुछ गणनाएँ: लगभग 3228 ईसा पूर्व (BCE) को जन्म मानती हैं।
  • अन्य गणनाएँ: 3229 या 3227–3228 BCE के आस–पास की तिथियाँ देती हैं (17/18 या 18 जून, 21 जुलाई जैसी ग्रेगोरियन तिथियों के रूप में)।
  • अधिकतर आधुनिक ज्योतिषीय आकलन: सब यही मानते हैं कि जन्म द्वापर युग के अंत के निकट, और कली युग शुरू होने (18 फरवरी 3102 BCE) से लगभग 126 वर्ष पहले हुआ।

सरल शब्दों में: ऐतिहासिक–वैज्ञानिक रूप से एक सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत “एक दिन” तय नहीं है, लेकिन परंपरा कृष्ण को लगभग 5000 वर्ष पूर्व, द्वापर से कली युग के संधिकाल में जन्मा मानती है।

हिन्दू पंचांग के अनुसार

हिन्दू धर्म में कृष्ण जन्म की पहचान ग्रेगोरियन डेट से नहीं, इन पंचांगीय विशेषताओं से की जाती है:

  • मास: श्रावण या भाद्रपद (क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार)
  • पक्ष: कृष्ण पक्ष
  • तिथि: अष्टमी (जैसे “श्रावण कृष्ण अष्टमी” या “भाद्रपद कृष्ण अष्टमी”)
  • नक्षत्र: रोहिणी नक्षत्र
  • समय: निषीथकाल / आधी रात के आस–पास
  • स्थान: मथुरा, कारागार में, माता देवकी और पिता वसुदेव के यहाँ जन्म, पर पालन–पोषण नंद–यशोदा के घर, गोकुल में।

यही दिवस हर वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है।

आधुनिक तिथि–अनुमान (सारांश में)

नीचे तालिका में कुछ प्रचलित गणनाएँ दी गई हैं (ये ऐतिहासिक “प्रमाणित” नहीं, बल्कि विद्वानों के खगोलीय–ज्योतिषीय अनुमान हैं):

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स्रोत / परंपरा अनुमानित ग्रेगोरियन तिथि अनुमानित वर्ष (BCE) सामान्य टिप्पणी
ड्रिक पंचांग (ज्योतिषीय गणना) 19 जुलाई 3228 BCE (पंचांग के आधार पर, आधी रात, अष्टमी + रोहिणी) 3228 BCE द्वापर अंत, कली युग आरंभ 18 फरवरी 3102 BCE से लगभग 126 वर्ष पहले।
कुछ आधुनिक ज्योतिषीय शोध लेख 21 जुलाई 3228 BCE, या समान तिथियाँ 3228 BCE खगोलीय संयोजनों (नक्षत्र, चंद्र स्थिति) से अनुमान।
अन्य परंपरागत गणनाएँ 18 जून 3229 BCE (अर्धरात्रि, श्रावण कृष्ण अष्टमी) 3229 BCE कई जीवन–घटनाओं की तिथियों से उलटी गणना।
श्री सत्य साई प्रवचन–आधारित गणना 20 जुलाई, लगभग 3228 वर्ष ईसा से पूर्व लगभग 3228 BCE युग और नक्षत्र आधारित विवरण।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • ये सभी तिथियाँ धर्मग्रंथों, पुराणों और खगोलीय मॉडल पर आधारित हैं; इन्हें आधुनिक अर्थ में “इतिहास की पक्की तारीख” नहीं कहा जा सकता।
  • धार्मिक–आध्यात्मिक दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि कृष्ण जन्म धर्म की पुनर्स्थापना और अधर्म के विनाश के लिए अवतार माने जाते हैं, न कि किस दिन का कौन–सा सन् था।

संक्षेप में:
कृष्ण कब जन्मे? – परंपरा के अनुसार, द्वापर युग के अंत में, भाद्रपद (या श्रावण) कृष्ण पक्ष की अष्टमी की आधी रात, रोहिणी नक्षत्र में मथुरा में; आधुनिक अनुमान इसे लगभग 3228–3229 BCE के बीच रखते हैं।

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